Sunday, May 30, 2010




जिनकी झलक मे करार बहुत है…
उसका मिलना दुशवार बहुत है..

जो मेरे हांथों की लकीरों मे नहीं …….
उस से हमें प्यार बहुत है..

जिस को मेरे दिल का रास्ता भी नहीं मालूम…….
इन धडकनों को उसका इंतज़ार बहुत है..

ये हो नही सकता कि हम उन्हे भुला दे..
क्या करें हमे उसपे एतबार बहुत है..

2 comments:

संजय भास्कर said...

सुन्दर रचना ......एक अच्छी अभिव्यक्ति ....कुछ पंक्तिया लाजवाब ......

संजय भास्कर said...

सुन्दर रचना!
शब्द संयोजन बहुत बढ़िया है!