Thursday, May 13, 2010

तुज से प्यार .......क्यों है मुझे ...


मेरे ही दिल से पूछो की है मुझको तुझ से प्यार कितना

समंदर की बांहों में मौजे भी ना हो जितना

रब से ही माँगा है तुझको रब्बा ही करे खैर

अब तो सनम तेरे ही पयार में मुझको है मर मिटना

प्यार की राहों में मिलेंगे हजारो गम सनम

साथ ना मेरा छोड़ना तुझसे इल्तजा है सिर्फ इतना

बहारे आती जाती है मौसम लेते है रंग कई

चाहती हु तुझे इतना ना चाहा हो किसी को किसीने जितना .....

पलक

1 comment:

संजय भास्कर said...

palak ji bahut hi prem se bahri kaviyate hai aapki ...
main aap se ek ijazat chahta hoon..
maine kisi par kavita likhni hai..
par likh nahi pa raha hoon..

par aapki kavita TUJSE PYAR KYO HAI MUJHE---
sahi jaawb laga..

main sie apne blog par parkashit karna chata hoon..
aapke naam se..
aur blog link se sath

agr aap kahegi to hai varna nahi........