Friday, February 23, 2018

महोब्बत में नही है फर्क जीने और मरने का...

उसी को देख कर जीते है जिस काफिर पे दम निकले....

Wednesday, January 10, 2018

नारी


तू चंदन से बनी,
तू केसर से बनी,
तू गुलाब की काया है
ये इतना सौंधापन,
ये इतनी महक,
सब तेरी ही माया है
तू श्लोकों से बनी,
तू ऋचाओं से बनी,
तू ही वेद-पुरान है
ये कालिदास की कला,
केशव का काव्य सब तेरा ही दान है
तू धरम से बनी,
तू करम से बनी,
तू ही पुण्यप्रताप है
ये कृष्ण की राधा,
ये राम की सीता,
सर्वत्र तेरा ही जाप है
तू गंगा से बनी,
तू जमुना से बनी,
तुझमें नर्मदा समाई है
ये शिव अभिषेक,
ये कुम्भ स्नान,
सबमें तेरी ही परछाई है
तू लौह से बनी,
तू स्वर्ण से बनी,
तू अद्वितीय प्रतिमान है
ये देश गौरव,
ये संसार का सातत्य,
तेरा ही वरदान है
तू प्रीत से बनी,
तू संयम से बनी,
तू ही भाग्य विधाता है
ये गर्भस्थ शिशु,
ये वीर पुरुष, तू ही सबकी दाता है .....

-डॉ. मधुसूदन चौबे

Saturday, January 6, 2018

अधूरी सी कहानी दिल

की और पूरा प्यार तुम,

गीली पलकों की नमी

और बेरहम याद तुम,

अनछुआ दिल का कोना

और रुह मे घुला एहसास

हो सिर्फ तुम।

Thursday, December 28, 2017

जिसको भी हासिल किरदार ना हुआ मेरा
वो मेरे दामन ए वजूद को दाग़दार कह गए ...!!!

~~PG~~

Sunday, December 24, 2017

वो मुझे मेहंदी लगे हाथ दिखा कर रोई, मैं किसी और की हूँ बस इतना बता के रोई!
शायद उम्र भर की जुदाई का ख्याल आया था उसे, वो मुझे पास अपने बैठा के रोई !

कभी कहती थी की मैं न जी पाऊँगी बिन तुम्हारे, और आज ये बात दोहरा के रोई!
मुझसे ज्यादा बिछड़ने का ग़म था उसे, वक़्त-ए -रुखसत वो मुझे सीने से लगा के रोई!

मैं बेक़सूर हूँ कुदरत का फैसला है ये, लिपट कर मुझे बस इतना बता के रोई।
मुझ पर दुःख का पहाड़ एक और टूटा, जब मेरे सामने मेरे ख़त जल के रोई।

मैं तन्हा सा खुद में सिमट के रह गया, जब वो पुराने किस्से सुना के रोई।
मेरी नफ़रत और अदावत पिघल गई एक पल में, वो वेबफ़ा थी तो क्यों मुझे रुला के रोई।

सब गिले-शिकबे मेरे एक पल में बदल गए, झील सी आँखों में जब आँसू के रोई।
कैसे उसकी मोहब्बत पर शक़ करूँ मैं, भरी महफ़िल में वो मुझे गले लगा के रोई !....

Thursday, December 21, 2017

रहने दे मुझे यूँ उलझा हुआ सा तुझमें,

सुना है सुलझ जाने से धागे अलग अलग हो जाते हैं..!!!

Thursday, December 14, 2017

आइने संग कुछ समय बिता ...

अभी पलटी ही थी वो ....,

कि बोल उठा वो अहंकारी आइना ...

तेरी सुन्दरता मेरे अस्तित्व से है ...,

एक मीठी मुस्कान के साथ ...

वो मुखातिब थी आइने से ....

सुन्दरता मेरी मोहताज़ नहीं ....

किसी के अस्तित्व की ....

ये मेरा वजूद है ....
जो मुझे इस काबिल बनाता है ......