Monday, June 30, 2008

एक लकीर तेरे नाम की ..

कुछ उदास कुछ खामोश
कुछ बेबस से लकीरे मेरे हाथ की..
ढूंढती रहती हूं अक्सर इन लकीरों मैं
एक लकीर तेरे नाम की
कुछ मालूम भी हे .....
कुछ दिल भी जनता हे ....
के इन लकीरों में कोई लकीर नही तेरे नाम की ....
फिर भी ना जाने क्यों ढूढती रहती हूं .....
अक्सर एक लकीर तेरे नाम की ......
एक लकीर
तेरे नाम की.... !
एक लकीर
तेरे प्यार की.... !




पलक ...........

2 comments:

Anonymous said...

हाथो में होती है लकीरे हज़ार, किसी में गम तो किसी में खुशियों की बहार, न जाने वो कोनसी लकीर है जिस में खुदा ने है लिख दिया आप का प्यार...
पर्ल...

raaaj said...

Kabhi dillagi karta hai kabhi shikayaten,
Kabhi to bahut kareed hai, kabhi to hai kitne faasle,
Tu hi dil hai tu hi dard e dil hai,
Tune jaana hai par jaan kar bhi anjaana hai,

Kaisa hai mera humdam kaisa hai yeh pyar,
Waise hi jaise bhawra ho kali pe nisaar,
Jaise samandar ke liye kinara hai,
yeh pyar kitna pyara hai, jaan kar bhi anjana hai.

-----raaaj