Monday, September 1, 2008

उस से कहना की..........



उस से कहना किताबों मैं रखे सुखे हुए कुछ फूल उस के लौट आने का यकीं अब तक दिलाते है ,
उस से कहना उस की जील सी आंखे किसी मंज़र पर छा जाए तो सब मंज़र युही भीग जाते हैं ,
उस से कहना ठंडी बर्फ पर कोई किसी के साथ चलता है तो दिल फ़िर से उन क़दमों के निशान से उसी के लौट आने की उम्मीद करता है ...
उस से कहना उसकी भीगती आखों का वो आसू सितारे की तरह अब भी हमें शब् भर जगाता है ,
उस से कहना के बारिश आज भी उन खिड़की पर बूंदों से उस का नाम लिखती है ,
उस से कहना की खुशबू, चांदनी तारे , रास्ते , घटा, काजल ,शबनम, हवाएं , रात और दिन, बादल ये सभी नराज़ है ....उस से कहना जुदाई के रिश्तों पर जो सूखी टहनियां है वो सारी बर्फ की चादर मैं कब की ढक चुकी है ....
उस से कहना की शाखों पर जो पत्ते थे वो अब सुनहरे हो चुके है ....
उस से कहना की..........
बस अब लौट आए .......
मेरे पास लौट आए... ...


पलक

3 comments:

amul said...

Hi pal,

bahut hi achhi hai..


एक ही ख़्वाब कई बार देखा है मैं ने
तूने साड़ी में उड़स ली है मेरी चाभियाँ घर की
और चली आयी है बस यूँही मेरा हाथ पकड़ कर

मेज़ पर फूल सजाते हुए देखा है कई बार
और बिस्तर से कई बार जगाया है तुझको
चलते फिरते तेरे कदमों की वोह आहट भी सुनी है

गुनगुनाती हुई निकली है नहा कर जब भी
अपने भीगे हुए बालों से टपकता पानी
मेरे चेहरे पे छिटक देती है तू टिकु की बच्ची

ताश के पत्तों पे लड़ती है कभी कभी खेल में मुझसे और कभी लड़ती भी है ऐसे के बस खेल रही है मुझ्से और आग़ोश में नन्हे को लिये


जब तुम्हारा ये ख़्वाब देखा था,
अपने बिस्तर पे मैं उस वक़्त पड़ा जाग रहा था..

atharv said...

hello palak

its really nice poem
palak tumhari sab kavitaye payri hoti hai .. mai sirf ek cheez kehna chahta hu ki kavitaao ka chunav karna apnay aap mai badi baat hai. aur yaha jab tumhari pasand ki kavitaye aati hai to baat sirf chunaav per jati hai .. chahe wo kavita aap ne likhi ho ya nahi shayd is se koi fark nahi padta.. ye mera personal review hai ...
keep posting..

Anonymous said...

From this I feel that you are really missing someone!
Pearl...