Monday, June 28, 2010

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“चले थे कुछ कोस….
मगर कदम मेरे फिर रुक गए…
कहना था जिन्हे कुछ…
कहे बिना ही लौट गए…
आज फिर बात दिल में रह गई….
जैसे हमारी सासें उनके हाथों में रह गई…



लौट तो आई हु ....
कुछ बिना कहे..
पर लगता है इसमें भी अरसे लग गए…


कब मिलेंगे वो…
अब तो तमन्ना है यही…
मिले तो एक बार चाहे सपने में ही सही…
कह दूँगी तब अपने सभी दिले-राज…
जाने कब आएगी वो रात…!!

6 comments:

Anonymous said...

मिले तो एक बार चाहे सपने में ही सही…
कह दूँगी तब अपने सभी दिले-राज…

Ek baar to milo sajana...

~Pearl...

sahil said...

मुझको यह अहसास रहा है
वह मेरे ही पास रही है

मन प्यासा है उसकी खातिर
बनकर मेरी प्यास रही है

सब टूटे, वह साबुत अब तक
रिश्ता कोई ख़ास रही है

उसके अंदर पढ़ लो मुझको
वह मेरा इतिहास रही है

उसके बिन भी जी लेता हूँ
मुझको यह अभ्यास रहा है

कहने को गुलशन हूँ, लेकिन
दूर-दूर मधुमास रहा है!

sahil said...

Gam hai ya , khushi hai tu,
Meri zindgi hai tu.....
Tu kuch kahe ya , khamosh rahe,
Meri bandgi hai tu....
Meri raat ka charag, Meri neend bhi hai tu...
Meri Zindgi hai tu...

sahil said...

Meri sari zindgi main .
ek hi kami hai tu..
Sari zindgi hai tu...

Pyar jab had se gujar jaayee..
hoth sil jate hain...
aankhen juban ban jati hain..
Dhadkane waqt ka ehsas karati hain..

संजय भास्कर said...

कुछ तो है इस कविता में, जो मन को छू गयी।

Anonymous said...

sometimes some wait is worth the pain of waiting..wish you get everything what u wish for..tc..
ur lines makes me always go into d different world of thoughts and then it becomes difficult to return from that world..
nice one..!!