Saturday, June 5, 2010

अनुभूति ....


तू एक दुआ था
जो बिन माँगे फल गयी थी
खुदा की यह नेमत
मुझे अज़ीज़ थी बहुत
मगर मैं इस बात से अंजान थी
की तू एक नेमत था
जब मैने तुझ पर हक़ जताया
वो नेमत मुझसे छीन ली गयी

क्यों की तुम रब की दी हुए नेमत था
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तू वो वक़्त है
जो मैने जिया है
जिसने मुझे रुलाया भी
हँसाया भी
मुझे मुझ से मिलाया भी
मगर वक़्त की आदत है बीत जाना
तू वक़्त था॥
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तू वो रिश्ता है
जो मेरा हमदर्द भी है
हम राज़ भी
जिसकी छाँव में
मैं महफूज़ थी
शायद मुझे ही
रिश्ते संभालना नही आया…


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तू एक ख्वाब था
ज़िंदगी का
ख़ुशी का
ख्वाब भी कभी
सच हुए हैं भला…

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तू एक कसक है
याद आता है
तो होंठों पर
ख़ुशी की एक लक़ीर खिच जाती है और
जाते जाते
एक तड़प छोड़ जाता है
तू बस एक कसक बन गया है …।


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कोई तुज से कह दे आ कर

कि मैं अब नही रही
कि तुझसे जुड़ के ही तो पाई थी
खुद की पहचान मैने
तू जाते जाते
मेरे होने का एहसास भी ले गया
तू मुझे साथ ही ले गया…!!




5 comments:

Dheeraj Goel said...

Dua Jab Kabool Hoti hai,
Vo Khushi Aanmol hoti hai.

Par Kuch hi Palo baad, us Dua ki Ehmiyat Dhul Hoti hai.

Kar Bethte Hai Phir ek Nayee Dua,
Sochte hai ye bhi Kabool Hogi.

Par Jab Rakhi nahi Sambhak kar vo dua, To kaise Duae kabool hogi.

संजय भास्कर said...

प्रेम से परिपूर्ण ...खूबसूरत अभिव्यक्ति...

संजय भास्कर said...

वाह!! बहुत खूब कहा!! उम्दा रचना!

Palak said...

sanjay ji ye kavitaa meri likhi hue nahi hai perha maine kahi padhi thi. waha rachna kar ka naam nai likha tha is liye mai yaha nahi likh pai agar muje maloom hota to mai jarur unka naam yaha likhti.

pankti u r my best frd .. per dear ye kavita maine nahi likhi aur shayd ye yaha batana jaruri hai ki ye meri rachna nahi hai

Anonymous said...

a feeling that our love will grow / You're my heart, you're my soul / That's the only thing I really know

~Pearl...