Saturday, June 5, 2010

खुशबू ...!!!!


लग के सिने से जब कभी

तुम

मेरे कंधे पर सर रख देती हो

कुछ महकती खुशबू

मेरी गर्दन पे बड़ी मासूमियत से

सुबह से शाम तलक

तेरी सासें

महकती रहती है

3 comments:

संजय भास्कर said...

सरल,सहज रूप में भावों की आकर्षक प्रस्तुति

संजय भास्कर said...

हमेशा की तरह एक सुंदर अभिव्यक्ति..बढ़िया लगी बधाई..

संजय भास्कर said...

itnee gahraee.....pyar kee....isee ko kahte hai unconditional love...