Sunday, February 20, 2011

हसरत तुज़े पाने की .....!!!!


टूटे हुए खवाबों में हकीक़त ढूढती हु ,
पत्थर के दिलों में मोहब्बत ढूढती हु .
नादान हूँ में अब तक यह भी नहीं समझी ,
बेजान बातो में इबादत ढूढती हु .
मेरे जज्बातों की कीमत यहाँ कुछ भी नहीं ,
बेईमानी के बाजारों में शराफत ढूढती हूँ .
इस अजनबी दुनिया में कोई भी अपना नहीं ,
गैरों की आँखों में अपनी सूरत ढूढती हूँ .
उम्मीद की थी प्यार की बस येही भूल थी मेरी ,
गिरते हुए अश्कों में अपनी हसरत ढूढती हूँ

2 comments:

Raj said...

Bahut pyaari si rachna hai aapki Palak...

ise padh ke ek baat yaad aa gayi....
"Sapane bechne to nikale ho Bazar mein...kabhi socha hai uski kimat kya hogi?"

Aap ke jasbaat bahut pyaare se hai...

संजय भास्कर said...

बहुत ही सुन्‍दर शब्‍दों....बेहतरीन भाव....खूबसूरत कविता...