Saturday, August 28, 2010


क्या खूब एहसास है प्यार का

मन की अँधेरी मिटटी मै

पड़ा रहता है चुप चाप सा

पर जब किसी सूरज का

उष्म स्पर्श पाया

तोह चला आता है

वो अंधेरो की मिटटी से बहार

लहराता .... झूमता

सफ़ेद - पाक ... खुशबूदार
------प्यार -----


2 comments:

संजय भास्कर said...

वाह जी क्या बात है...हर सोच में अदा है आपकी तो.

सुंदर अभिव्यक्ति.

संजय भास्कर said...

ये अदा बड़ी अच्छी है ...चलो आशिक सा हो जाता हूं

दिल को छू गई आपकी ये रचना...बेहतरीन