Tuesday, August 24, 2010



अपनी यादें अपनी बातें ले कर जाना वों भूल गया,

जाने वाला जल्दी मैं था मिल कर जाना भूल गया..

मुड मुड कर देखा था उस ने आधे रस्ते से मुझे ,

जैसे उसे कहना था कुछ ...जो वों कहना भूल गया.

वक़्त-इ-रुखसत मेरी आँखें पोंछ रहा था अंचल से,

उसको ग़म था इतना ज्यादा खुद वों रोना भूल गया
पलक

3 comments:

sunil said...

Uski chaht mein apane aap ko mita diya usne..ki woh apne aap ko bhool gaya.....jab hosh aaya to woh use bhool chuki thi....."sadma" seh na saka woh...."dillagi" karna hi bhool gaya woh!!!!

vinay said...

बहुत खूब अपने को भूलने पर लिखा,बहुत अच्छा काव्य ।

Anonymous said...

kitna sach hai...at times the sadness of one's own heart makes him/her forget everything..including our own tears..nice one..tc...
Snkr...