Thursday, August 21, 2008

मेरे होने का मतलब दे दो.....................

बाजुओ पर सर रख सोने दो
थक चली हूँ अब तो रुखसत होने दो
जन्मो से चल रही हूँ साथ तेरे
अब तो कुछ देर ठहरने दो...
मिट्टी पर खीची थी जो लकीरे
और बनाए थे आशियाने जो रेत पर
अपने अपने नसीब के हिस्से के
कुछ तो मकाँ बनने दो..
वो जो कहते है कि सब तेरा है
ये वक़्त ये आलम ये दिल भी तेरा है
ये आंखो मे जो अटका पड़ा है एक आँसू
उसे ही बस मेरे नाम रहने दो....
खिलते थे कभी तुम भी मेरे नाम से
और महक उठते थे इस खयाल से
एक पल को ही सही
फिर से वही सब सोच लो
मेरे होने के अर्थ को
मेरे होने का मतलब दे दो.....................पलक

3 comments:

amul said...

Hi Pal,

Wonderful really !!!



Bikhar rahi hai meri zaat usay kehna
Kabhi milay to yehi baat Usay kehna

Wo sath tha to zamana tha hamsafar mera
Magar ab koi nahi meray sath usay kehna

Usay kehna k bin us kay din nahi kat-ta
Sisik sisik k kati hai raat usay kehna

Usay pukaron k khud hi pohanch jaon us k pass
Nahi rahay wo halaat usay kehna

Har jeet us k naam kar raha hon me
Me Manta hoon apni Haar usay kehna..

Ravi Srivastava said...

Ho gar chaahat to
kisi ke hatho me apna hath de do,
jeevan ka arth svayam hi mil jayega.....

raaaj said...

har subah jab jab mein haatho ko dekhta hoon
apni lakeero mein tujhe dhundhta hoon
shayad teri koi lakeer ubhar aayee ho

good thinking ..keep it up.