Wednesday, August 17, 2011


आज जब बारिश हुए
ये भी एक ख्याल आया
क्यों न एक बदल हो
जो मेरा राज़दार हो
जो कुछ गुज़रा है
सुने वो एक पल ठहर के
तुम से जो भी कहना है
सुने वो हस कर
फिर चले वो मुस्कुरा के
फिर बरसे वो
बेधड़क हो कर
आज ही तेरे दिल पर...

Friday, August 5, 2011

मुझे सिर्फ इंसान रहने दो ....!!

ना दो मुझे कोई पहचान 
मुझे सिर्फ इंसान रहने दो 
मज़हब की जरूरत होगी तुमको 
मुझे तो अब बेदाग़ रहने दो 

खुदा के बन्दों को अब 
ना कोई  नाम की जरुरत है 
हर शख्स को जीने के लिए 
अब तो सिर्फ सुकून की जरुरत है 

मजहब  को  मेरा  अब 
अपना  मामला  रहने  दो  
ना दो मुझे कोई पहचान 
मुझे सिर्फ इंसान रहने दो 

ख्वाब फिर सजा है आखों मैं 
धरती को जन्नत बन ने के 
न डालो फिर से ज़हर 
न घोलो रंग खुदगर्जी के 
इन्हे इस बार तुम बेरंग ही रहने दो 
मुझे सिर्फ इंसान रहने दो 

सरपरस्ती के शौखीन तुम से है गुज़ारिश 
कर सको तो इतना एहसान कर दो 
छोड़ दो अपने हाल पर लोगो  को 
इन्हे  ईमान पर  सिर्फ जिन्दा रहने दो 

न दो मुझे कोई पहचान 
मुझे सिर्फ इंसान रहने दो 

Thursday, August 4, 2011

ख्वाब तेरा होने का ....!!!!!


तेरे होठों की हसी बनने का ख्वाब है 
तेरे आगोश मैं  सिमट जाने का ख्वाब है 
तू लाख बचा ले दामन  इश्क के हाथो 
असमान बन कर तुजे पर छाने का ख्वाब है 
आज़माइश यु तो अच्छी नहीं होती इश्क की 
तू चाहे तो तेरी तकदीर सजाने का ख्वाब है 
वो मौत भी लौट जाये तेरे दरवाजे पे आ कर 
तुजे ऐसे जिन्दगी देने का ख्वाब है 
जी भी लगे अगर जीना पड़े तेरे बिना 
लेकिन एक बार तुज पर  मर मिटने का ख्वाब है 

Thursday, July 21, 2011



एक पुरानी किताब के पन्नों पे आज उंगली चलाई
जाने कहाँ से कुछ धीमी आवाज़ें आई

आवाज़ एक जानी पहचानी सी
आवाज़ें कुछ बरसों पुरानी सी

एक हँसी थी दूर से आती हुई
गूंजती थी दिल को भरमाती हुई

कितनी ही बातें थी उस आवाज़ में
जाने क्या कह गई अपने ही अंदाज़ में

एक संगीत खामोशी की नींद तोड़ता हुआ
पुरानी ग़ज़लों का दुशाला ओढ़ता हुआ

कुछ सवाल उठे उचक कर ऐसे
नींद से कोई बच्चा जागता हो जैसे

बूढ़ी पंखुड़ियों से बुझी राख टटोल रहा था
उस किताब में दबा एक गुलाब बोल रहा था

मेरा हाथ पकड़ कर वो मुस्कुराने लगा
किन्ही बिछ्ड़े रास्तों पर ले जाने लगा

कुछ सोच कर मैंने उसका हाथ झटक दिया
किताब बंद कर उसका मुंह भी बंद कर दिया


"शब्द संवेदन के खजाने से " 

Friday, July 8, 2011

तेरे जाने के बाद इतना सा गिला रहा हम को 
तू पलट कर देख लेता अगर 
तो जिन्दगी इंतज़ार मै गुजार लेते 



कभी  पूछ का देख अपनी यादो का आलम 
सारी सारी रात सितारों  से तेरा जिक्र करते है 

Tuesday, June 14, 2011

नामुमकिन सी आरजू .....





काश कहा होता

तुम्हे ख़ुशी चाहिए ,

हम दुनिया भर की दे देते,

काश तुम ने कहा होता,
ख्वाहिश पूरी करने को,

हम एक भी अरमान बाकि नहीं रखते,

कहा काश तुम ने कहा होता,
तारे तोड़ लेन को,

सारा आकाश ले आते,

काश तुम ने कहा होता,
प्यार करने को,

आखिरी सास तक करते,

काश तुम ने कहा होता ,
जान दे देने को,

हस्ते हस्ते दे देते,

पर तुम तो वोह मांग बैठे

जो मेरे बस में नहीं

नामुमकिन सी आरज़ू
तुम से जुदा होकर जीना …