Friday, December 24, 2010

कसक .... !




तेरी तस्वीर मेरी आँखों में बसी क्यूँ है
जिधर देखो बस उधर तू ही क्यूँ है

तेरी तकदीर से जुडी मेरी तकदीर है लेकिन
तुझे ना पा कर मेरी तकदीर रूठी क्यूँ है

मुझ को है खबर यु आसान नहीं तुझे हासिल करना
फिर भी यह इन्तिज़ार यह बेकरारी क्यूँ है

बरसों गुज़र गए मेरे तन्हाई में लेकिन
मेरी बांहों को आज भी तेरा इन्तिज़ार क्यूँ है

तेरी चाहत की कसम सहे मैंने हर इलज़ाम -ऐ - इश्क
अब नहीं है कुछ बाकी फिर यह जान बाकी क्यूँ है

ख़तम हुआ अब मेरा यह अफसाना एक बात बतादू लेकिन
अंजाम - ऐ - इश्क है मालूम मुझे फिर यह मुहब्बत क्यूँ है

3 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

sundar abhivyakti

"मेर्री क्रिसमस" की बहुत बहुत शुभकामनाये

KING said...

So Sentimental & Heart Touching !! Keep Going !! www.rockwithking.blogspot.com

Raj said...

Aap ki yeh "Rachna" hazaro dilo ki daastaan hogi shayad....dhanyawaad..is rachna ke liye....kitne sundar tarike se aapne likha hai palak....bahut adbhut ehsaash hai is mein....sachhi