Saturday, January 6, 2018

अधूरी सी कहानी दिल

की और पूरा प्यार तुम,

गीली पलकों की नमी

और बेरहम याद तुम,

अनछुआ दिल का कोना

और रुह मे घुला एहसास

हो सिर्फ तुम।

Thursday, December 28, 2017

जिसको भी हासिल किरदार ना हुआ मेरा
वो मेरे दामन ए वजूद को दाग़दार कह गए ...!!!

~~PG~~

Sunday, December 24, 2017

वो मुझे मेहंदी लगे हाथ दिखा कर रोई, मैं किसी और की हूँ बस इतना बता के रोई!
शायद उम्र भर की जुदाई का ख्याल आया था उसे, वो मुझे पास अपने बैठा के रोई !

कभी कहती थी की मैं न जी पाऊँगी बिन तुम्हारे, और आज ये बात दोहरा के रोई!
मुझसे ज्यादा बिछड़ने का ग़म था उसे, वक़्त-ए -रुखसत वो मुझे सीने से लगा के रोई!

मैं बेक़सूर हूँ कुदरत का फैसला है ये, लिपट कर मुझे बस इतना बता के रोई।
मुझ पर दुःख का पहाड़ एक और टूटा, जब मेरे सामने मेरे ख़त जल के रोई।

मैं तन्हा सा खुद में सिमट के रह गया, जब वो पुराने किस्से सुना के रोई।
मेरी नफ़रत और अदावत पिघल गई एक पल में, वो वेबफ़ा थी तो क्यों मुझे रुला के रोई।

सब गिले-शिकबे मेरे एक पल में बदल गए, झील सी आँखों में जब आँसू के रोई।
कैसे उसकी मोहब्बत पर शक़ करूँ मैं, भरी महफ़िल में वो मुझे गले लगा के रोई !....

Thursday, December 21, 2017

रहने दे मुझे यूँ उलझा हुआ सा तुझमें,

सुना है सुलझ जाने से धागे अलग अलग हो जाते हैं..!!!

Thursday, December 14, 2017

आइने संग कुछ समय बिता ...

अभी पलटी ही थी वो ....,

कि बोल उठा वो अहंकारी आइना ...

तेरी सुन्दरता मेरे अस्तित्व से है ...,

एक मीठी मुस्कान के साथ ...

वो मुखातिब थी आइने से ....

सुन्दरता मेरी मोहताज़ नहीं ....

किसी के अस्तित्व की ....

ये मेरा वजूद है ....
जो मुझे इस काबिल बनाता है ......

Sunday, December 3, 2017

तजुर्बा नाकाम मोहब्बत का भी जरूरी है जिंदगी में,

वर्ना दर्द में मुस्कुराने का हुनर कहाँ से आएगा...!!!

Tuesday, November 28, 2017


मुझे अच्छा लगता है मर्द से मुकाबला ना करना और उस से एक दर्जा कमज़ोर रहना -

मुझे अच्छा लगता है जब कहीं बाहर जाते हुए वह मुझ से कहता है "रुको! मैं तुम्हे ले जाता हूँ या मैं भी तुम्हारे साथ चलता हूँ "

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझ से एक कदम आगे चलता है - गैर महफूज़ और खतरनाक रास्ते पर उसके पीछे पीछे उसके छोड़े हुए क़दमों के निशान पर चलते हुए एहसास होता है उसे मेरा ख्याल खुद से ज्यादा है

मुझे अच्छा लगता है जब गहराई से ऊपर चढ़ते और ऊंचाई से ढलान की तरफ जाते हुए वह मुड़ मुड़ कर मुझे चढ़ने और उतरने में मदद देने के लिए बार बार अपना हाथ बढ़ाता है -

मुझे अच्छा लगता है जब किसी सफर पर जाते और वापस आते हुए सामान का सारा बोझ वह अपने दोनों कंधों और सर पर बिना हिचक किये खुद ही बढ़ कर उठा लेता है - और अक्सर वज़नी चीजों को दूसरी जगह रखते वक़्त उसका यह कहना कि "तुम छोड़ दो यह मेरा काम है "-

मुझे अच्छा लगता है जब वह मेरी वजह से शर्द मौसम में सवारी गाड़ी का इंतज़ार करने के लिए खुद स्टेशन पे इंतजार करता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे ज़रूरत की हर चीज़ घर पर ही मुहैय्या कर देता है ताकि मुझे घर की जिम्मेदारियों के साथ साथ बाहर जाने की दिक़्क़त ना उठानी पड़े और लोगों के नामुनासिब रावैय्यों का सामना ना करना पड़े -

मुझे बहोत अच्छा लगता है जब रात की खनकी में मेरे साथ आसमान पर तारे गिनते हुए वह मुझे ढंड लग जाने के डर से अपना कोट उतार कर मेरे कन्धों पर डाल देता है -
मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे मेरे सारे गम आंसुओं में बहाने के लिए अपना मज़बूत कंधा पेश करता है और हर कदम पर अपने साथ होने का यकीन दिलाता है -

मुझे अच्छा लगता है जब वह खराब हालात में मुझे अपनी जिम्मेदारी मान कर सहारा देने केलिए मेरे आगे ढाल की तरह खड़ा हो जाता है और कहता है " डरो मत मैं तुम्हे कुछ नहीं होने दूंगा" -

मुझे अच्छा लगता है जब वह मुझे गैर नज़रों से महफूज़ रहने के लिए समझाया करता है और अपना हक जताते हुए कहता है कि "तुम सिर्फ मेरी हो " -

लेकिन अफसोस हम में से अक्सर लड़कियां इन तमाम खुशगवार अहसास को महज मर्द से बराबरी का मुकाबला करने की वजह से खो देती हैं
फिर ۔۔۔۔۔۔۔۔
जब मर्द यह मान लेता है कि औरत उस से कम नहीं तब वह उसकी मदद के लिए हाथ बढ़ाना छोड़ देता है - तब ऐसे खूबसूरत लम्हात एक एक करके ज़िन्दगी से कम होते चले जाते हैं , और फिर ज़िन्दगी बे रंग और बेमतलब हो कर अपनी खुशीया खो देती है