Tuesday, November 3, 2009

पूछु क्या तुज से ,अब ना मैं तेरी चाहत मैं शामिल....


मैंने उससे एक इशारा किया
उसने सलाम लिख के भेजा.
मैंने पूछा तुम्हारा नाम क्या है?
उसने चाँद लिख के भेजा.
मैंने पूछा तुम्हे क्या चाहिए?
उसने सारा आसमान लिख के भेजा.
मैंने पूछा कब मिलोगे?
उसने कयामत की शाम लिख के भेजा.
मैंने पुछा किस से डरते हो?
उसने मुहब्बत का अंजाम लिख के भेजा
.
मैंने पूछा तुम्हे नफरत किस से है?
उसने..मेरा ही नाम लिख के भेजा…

4 comments:

Anonymous said...

Waah क्या लिख के भेजा ! I Liked it very much!

~Pearl

raaaj said...

tumse aur nafrat! nhi maine to shayad yeh nhi likha tha!!!!!!!!!!!!! just kidding......really bahut achha laga

Anonymous said...

khwishen aisi kyun hoti hain?

Suman said...

मैंने पूछा तुम्हे नफरत किस से है?
उसने..मेरा ही नाम लिख के भेजा… nice