दर्द की बारिश मद्धम सही .... ज़रा आहिस्ता चल
दिल की मिट्टी है अभी तक नम .... ज़रा आहिस्ता चल
तेरे मिलाने और फिर तेरे बिछार जाने के बीच
फासला रुसवाई का है कम .... ज़रा आहिस्ता चल
अपने दिल में नहीं है उस की महरूमी की याद
उस की आंखों में भी है शबनम .... ज़रा आहिस्ता चल
कोई भी हो हम-सफर न हो खुश इस कदर
अब के लोगों में वफ़ा है कम .... ज़रा आहिस्ता चल
मेरी तम्मनाये करे कब तक इंतजार कोई भी दुआ इसे गले क्यों नही लगती, अगर हो जाती मुरादें पल मैं पुरी .... तो मुरादें नही ख्वाहिसे कहलाती....
Thursday, July 23, 2009
दर्द की बारिश ..!!!
Wednesday, July 22, 2009

गिनते भी कैसे करू उन बूंदूं की !
जो आंसू की धार बह गए!
हिसाब रख भी लेतें उस वक्त का….
अगर तोलकर मुहोब्बत करना आता हमें!
वोह छोड़ गए इस बात से ज्यादा….
वोह यादें तकलीफ देती है हमें!
वोह वफ़ा के वादें न करते,
तोह बेवफाई से शिकायत न होती!
दिल से चाह था उन्हें,
हर हुक्म को सराहा!
जो की उन्होंने गुजारिश जुदाई की,
तो हम करीब उनके रहते भी कैसे...
जो आंसू की धार बह गए!
हिसाब रख भी लेतें उस वक्त का….
अगर तोलकर मुहोब्बत करना आता हमें!
वोह छोड़ गए इस बात से ज्यादा….
वोह यादें तकलीफ देती है हमें!
वोह वफ़ा के वादें न करते,
तोह बेवफाई से शिकायत न होती!
दिल से चाह था उन्हें,
हर हुक्म को सराहा!
जो की उन्होंने गुजारिश जुदाई की,
तो हम करीब उनके रहते भी कैसे...
दर्द ...!!!!
आँसू-ओं के चलने की आवाज़ नही होती,
दिल के टूट ने की आहात नही होती,
अगर होता खुदा को हर दर्द का एहसास,
तो उसे दर्द देने की आदत नही होती!
Tuesday, July 14, 2009
ना अब वों राह है..ना अब वों हम…!!!
बदल सा गया कुछ, ना रहे अब वों हम
खो गए ख्याल, टूट गई है कलम
चलते चलते लिया वक्त ने यूँ मोड़
जा रहे थे कहीं, चल दिए कहीं हम
ना कहने को कुछ, ना सुनने की ख्वाहिश
हर जज्बे से खाली जैसे अब हुए हम
अस्खों का समुन्दर उमड़ रहा है दिल मैं
खुश्क हैं लेकिन, नहीं हैं आँखें नम
खो रहे हैं पुराने, जुड़ रहे नए रिश्ते
खो गए ख्याल, टूट गई है कलम
चलते चलते लिया वक्त ने यूँ मोड़
जा रहे थे कहीं, चल दिए कहीं हम
ना कहने को कुछ, ना सुनने की ख्वाहिश
हर जज्बे से खाली जैसे अब हुए हम
अस्खों का समुन्दर उमड़ रहा है दिल मैं
खुश्क हैं लेकिन, नहीं हैं आँखें नम
खो रहे हैं पुराने, जुड़ रहे नए रिश्ते
ना अब वों राह है॥ ना अब वों हम.....
पलक
Friday, June 19, 2009
Wednesday, June 17, 2009
एहसास ...
कितना प्यार करने लगे है ..
काश उन्हें यह एहसास हो जाए...
.ऐसा ना हो के वोह होश में तब आए जब हम गहरी नींद में सो जाए ..!!!
Tuesday, June 16, 2009
कल्पना

कल्पना के अनदेखे झूले में
सपनो के झरोखों से
एक बार मैंने देखा है तुम्हे
कंही खोकर ना रह जाए यह अहसास
बाँध लो हर साँस से साँस
प्यार का सफर लंबा नही
तुम उही ना बिछड़ जाओ कही
दिल के आशियाने में एक बार देखा है तुम्हे
ज़िन्दगी का अब एतबार नही
खाली जीवन हमें स्वीकार नही
जहाँ मेरी सीमा नही
उड़ना चाहते हो तुम वन्ही
उन सीमओं से परे मैंने देखा है तुम्हे
कल यह नज़ारे बदल ना जाए कंही
रो़क ना ले यह रस्मो रिवाज़ कंही
छोड़ दुनिया के साथ सभी
तोड़ सब बंधन आज यंही
खुले पंछी की तरह देखा है तुम्हे
इंतज़ार की इन्तहा हुए
आज तो मान जा युही
तुम्ही से प्यार है कहती हु
तुम बिन यह निरर्थ जीवन जीती हु
जीवन की जगह देखा है तुम्हे
कल्पना के अनदेखे झूले में
सपनो के झरोखों से
एक बार मैंने देखा है तुम्हे…
ज़िन्दगी का अब एतबार नही
खाली जीवन हमें स्वीकार नही
जहाँ मेरी सीमा नही
उड़ना चाहते हो तुम वन्ही
उन सीमओं से परे मैंने देखा है तुम्हे
कल यह नज़ारे बदल ना जाए कंही
रो़क ना ले यह रस्मो रिवाज़ कंही
छोड़ दुनिया के साथ सभी
तोड़ सब बंधन आज यंही
खुले पंछी की तरह देखा है तुम्हे
इंतज़ार की इन्तहा हुए
आज तो मान जा युही
तुम्ही से प्यार है कहती हु
तुम बिन यह निरर्थ जीवन जीती हु
जीवन की जगह देखा है तुम्हे
कल्पना के अनदेखे झूले में
सपनो के झरोखों से
एक बार मैंने देखा है तुम्हे…
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